Indian Republic Day Special War Story - १९६५ भारत पाकिस्तान युद्ध

Indian Republic Day Special
१९६२ में चीन द्वारा मिली हार के जख्म अभी ताजे ही थे की १९६४ में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु गुजर गये. पश्चिमी दुनिया और खासकर अमेरिका के कई बड़े अखबारों ने भारत के विघटन की भविष्यवानिया करना शुरू ही कर दिया था की मौकापरस्त पाकिस्तान ने इसे एक Opportunity समझा और भारत के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया. पर प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठा था एक इन्सान जिसने पाकिस्तान के पैरोतले जमीन खिसका दी...  नाम था लाल बहादुर शास्री

कहानी की शुरवात होती हे १९६५ में, कच्छ की दलदल में सर क्रिक नाम की एक खाड़ी हे... आज़ादी के बादसेही यहाँ सीमा विवाद था. दोनों देशो के अलग-अलग तर्क. नेहरु दुनिया में एक कद्दावर नेता माने जाते थे उनके कार्यकाल में पाकिस्तान इस बात पर ज्यादातर चुप था, पर १९६४ के बाद पाकिस्तान ने इस मामले को उछालना शुरू किया. १९६५ में इस सर क्रिक में छुटपुट गोलीबारी हुयी. तब भारत इस प्रश्न को चर्चा से सुलझाने पर राजी हो गया. पाकिस्तान ने इसे भारत का नर्म मिजाज मान लिया और इसे अपनी कुटनीतिक जित समझा.
Indian Republic Day 2018

पाकिस्तान अमरीकी गुट का था १९६५ आते-आते, अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप रोकने के लिए अमरीका ने पाकिस्तान हर वो चीज दी जिसकी उसे आवश्यकता थी जैसे पैसे, छोटे हथियारों से लेकर fighter planes तक. इसी वक्त भारतने अपना सबसे बड़ा नेता खो दिया था, १९६२ युद्ध से भारत की बहोत बड़ी आर्थिक आहात पुह्चायी थी, भारत की आर्थिक हालत इतनी पतली थी की प्रधानमंत्री शास्री ने देश को आवाहन किया की "हफ्ते में एक दिन का उपवास रखे, यहातक वे भी उपवास रखते थे" साथ ही किसानो को प्रोत्साहित करने के लिए "जय जवान, जय किसान" का नारा देकर हरित क्रांति की नीव रख्खी.

बात थी, १९६५ के ऑगस्ट महीने की पाकिस्तान ने कश्मीर में operation गिब्राल्टर नाम से अपनी स्पेशल forces को उतरना .... इस हेतु से शुरू किया की वे महत्वपूर्ण जगहों पर कंट्रोल करेंगे, साथ कश्मीर की जनता को भारत के खिलाफ करेंगे. पर कश्मीरी नागरिको जगह जगह पाकिस्तानियों को पकड़-पकड़ के मारा और कुछ को भारतीय सेना के हवाले कर दिया. operation गिब्राल्टर पूरी तरह से विफल हो चूका था.
2018 Indian republic Day

operation गिब्राल्टर के फेल होने के बाद जेनरल अयूब खान तिलमिला उठे, उन्होंने operation Grand slam नाम से Full Scale Attack शुरू किया जिसका उद्देश्य था अखनूर को जितना. अखनूर इतना महत्वपूर्ण क्यों था ? क्यों की उस वक्त कश्मीर घाटी से पूंछ और राजोरी जाने का रास्ता नहीं था, पुराना मुग़ल रोड जो पूंछ को कश्मीर घाटी से जोड़ता था वो सेना के आवागमन के काबिल नहीं था. अखनूर शहर से जानेवाला मार्ग वो अकेला मार्ग था जो पूंछ और राजौरी घटी को भारत से जोड़ता था. दुसरे लब्जो में कहा जाए तो अखनूर पे कब्ज़ा यानी पूंछ और राजौरी पर कब्ज़ा. भारतीय सेना की टुकड़ी ने जि-जान लगा दी और अखनूर की एक इंच जमीन पर भी नापाक पाकिस्तानियो के कदम पड़ने नहीं दिए. पर अब पूरी की पूरी पाकिस्तानी सेना कश्मीर पर टूट पड़ी थी. कश्मीर का तापमान अब बढ़ने लगा था.

युद्ध अभी बराबरी पर चल रहा था, पाकिस्तानने अपनि अमरीकी fighter planes की वजह से युद्ध में थोड़ी ज्यादा पकड़ बना ही ली थी की..... लालबहादुर शास्री ने इक ऐसा फैसला लिया जिससे पाकिस्तान के पैरोतले जमीन हिल गयी. उन्होंने जनरल जे.एन चौधरी को लाहोर front खोलने के लिए कहा.
Indo Pakistan war - Indian republic

लाहोर front खोलना एक बहोत ही साहसी कदम था, क्यों की लाहोर की सीमा International Boundary  थी और यहाँ कोई सीमा विवाद नहीं था. और इसे खोलने से पाकिस्तान के तत्कालीन पिता अमरीका भी युद्ध में कूद पड़ सकता था.
लाहोर front खुलने की वजह से पाकिस्तान को जो बढ़त कश्मीर में मिल रही थी... वो कमजोरी में बदल गयी और एकतरह से वे अपने दुसरे सबसे बड़े शहर को बचाने में भी असमर्थ हो गये थे. भारत की सेना लाहोर तक घुस गयी. पाकिस्तान के पास अमरीका के दिए बहोत ही उन्नत paton tanks थे, पर भारतीय सेना ने उनके छक्के छुड़ा दिए. पाकिस्तान ने भारत के एक गाव खेम-करन पर कब्ज़ा कर लिया था बादमे वहासे भी भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को मार भगाया.
उधर कश्मीर में भी भारतीय सेना ने पाकिस्तानी फ़ौजकी बहोतसी strategic locations पे कब्ज़ा कर लिया, उनमे से सबसे महत्वपूर्ण था हाजी पीर पास.


अमरीका और सोवियत के दबाव में जब दोनों देशो को युद्ध बंद करना पड़ा तब भारत ने पाकिस्तान के पंजाब की लगभग ४००० sqkm जमीन पर कब्ज़ा कर लिया था तो पाकिस्तान ने राजस्थान में ५०० sqkm रेगिस्तान पर बैठा था.
वैसे पाकिस्तानी फ़ौज ने भिक में मिले हथियार और अमेरिकी रोटी से शुरवात में बढ़त बनाली थी, पाकिस्तानि एयर force तकनिकी रूप से काफी उन्नत थी, पर भारत ने जब चढाई शुरू कर दी तो इनके छक्के छुट गये. कश्मीर में भारत ने हाजी पीर पास और बहोतसी जगहों को भारत में शामिल किया था. लाहोर, पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर भारतीय सेना की सांसे महसूस कर सकता था.

१९६५ का युद्ध में सेकंड वर्ल्ड war के बाद सबसे ज्यादा tanks का इस्तेमाल हुवा. १९४७, १९६५,१९७१ या १९९९ हर बार भारत ने दुनिया को बताया हे "बाप बाप होता हे और बेटा बेटा "

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